भारत की भूप्रुष्ट :
( physiography of India in hindi ) :
कोइ भी प्रदेश की भूप्रुष्ट उस प्रदेश की रचना, उस प्रदेश कि भुसपाटी पर लगने बाला आन्तरीक तथा बाह्य बल और प्रदेश के विकास का परीणाम है l
भारत की भुमि भूप्रुष्ट की द्रष्टि से अनेक विबिधता वाला प्रदेश है l
भारत के वर्तमान भुप्रुष्ट का निमार्ण भुगर्भीय प्रक्रियाओ जेसे आन्तरिक बल तथा हवा और पानी जेसे बाह्य बल के कारण क्षरण, कटाव, अपक्षय, निक्षेपन जेसे प्रक्रियाओ द्वारा हुआ है l इस भारत के भूप्रुष्ट के स्वरूप के प्रुथ्वी की भुसन्चालन प्रक्रिया बाह्य हलन चलन के परिणाम स्वरूप है l
भारत के भुखन्ड के भूप्रुष्ट और टेकटोनिक इतिहास के आधार पर मुख्य 6 लोगो मे बाटा है l
- उतर और उतर पूर्वीय पर्वत माला (The Northern and North Eastern Mountains)
- उतर भारत का मेदान (The Northern plain)
- द्वीपकल्पीय उच्च प्रदेश(The Peninsular Plateau)
- भारतीय मरुस्थल (The Indian Desert)
- तटीय मेदानो (The coastal plain)
- द्वीप समुह (The Islands)
उतर और उतर पूर्वीय पर्वत माला :(The Northern and North Eastern Mountains in hindi ) :
उतर तथा उतर पूर्वीय पर्वत माला हिमालय की पर्वतमाला तथा उतर पूर्वीय श्रुखला का समावेश होता है l
हिमालय की पर्वतमाला अरावली की पर्वतमाला से ऩइ गेड पर्वतो की श्रेणी है l हिमालय के मुख्यत्व 4 समान्तर पर्वत माला श्रेणी (ट्रान्स हिमालय, बृहद् हिमालय, लगु हिमालय, शिवालिक हिमालय) जेसे पर्वतो कि श्रेणी आए हुई हैं l
भारतीय हिमालय भारत की प्रस्चिम मे पाकिस्तान के पूर्वी सीमा से शुरू होकर भारत तिबेट, नेपाल, भुटान जेसे देशो मे होकर भारत के पूर्व की ओर म्यानमार देश तक विस्तारीत हैं l जो आगे जाके समुद्र में गरकाव हो जाती हैं l हिमालय कि लंबाइ पूर्व से पश्चिम दीशा मे आशरे 2500 km जबकि उसकी चोडाइ उतर दक्षिण दिशा में 160 km 400 km के बीच है l
हिमालय कि जो पर्वत श्रेणी भारत के जम्मु काश्मीर, लदाख, हिमालय प्रदेश तथा उतराखन्ड राज्यो ओर केन्द्र शासित प्रदेश मे से पसार होकर उतर- पश्चिम से द्दक्षिण -पूर्व तक जाती है l
जबकि सिक्किम राज्यो मे से पसार होती हिमालय कि पर्वत माला कि दीशा मे पश्चिम से पूर्व तरफ़ और अरुनाचल प्रदेश और अन्य राज्यो मे से पसार होती हैं जो हिमालय की पर्वतमाला की दिशा दक्षिण से उतर -पूर्वीय राज्यो मे हिमालय कि शाखा उतर - पूर्वीय राज्यो मे हिमालय कि शाखा उतर -दक्षिण दिशा मे भारत म्यानमार की सीमा मे समान्तर नागालेन्ड्, मणिपुर और मिजोरम राज्य मे से पसार होती है l
हिमालय कि उत्पत्ति :
(Origin of Himalayan in hindi):
हिमालय उत्पत्ति भुगर्भशास्त्री के अनुसार और भू - आकृति विज्ञान के विशेषज्ञों के लिए एक रसप्रद विषय है l
हिमालय पर्वतमाला एक जटील पर्वततन्त्र है l यह पर्वतमाला प्रिकेम्ब्रीयन युग (460 -54 करोड वर्ष पूर्व से लेके इओसीन युग (5.6-3.3)करोड वर्ष पूर्व) तक के खड्को देखा जाता है l
यहा बहोत ही गेड (fold) और भ्रश (fault )प्रस्तर और रूपान्तरित प्रकार के खडको आये हुए हैं l
हिमालय की उत्पत्ति के लिए दो सिद्धांत दीये गये है :
- भु - सन्नति का सिद्धांत (The theory of geosynclinal origin)
- भु - तक्ती विवर्तन सिद्धांत(The theory of plate tectonic origin)
भु - सन्नति का सिद्धांत (The theory of geosynclinal origin in hindi ) :
हिमालय की उत्पत्ति के लिए भु- सन्नति का सिद्धांत के समर्थको मे एड्वर्ड स्युस और लियोपोल्ड कोबर जेसे विध्दान थे l
यह सिद्धांत के अनुसार जब 200 मिलियन वर्ष पूर्व पेन्सिया नामक महाखन्डका लोरेन्शिया or अन्गारालेन्ड और गोन्ड्वानालेन्ड दो खन्डो के विभाजन हुआ था और टेथिस समुद्र कि रचना हुए थी l
यह महाद्रीप पर से नदी ओ के बहाव से बजरी और मीट्टी आति थी और टेथिस समुद्र मे जमा होती थी l क्रिटेशीयस काल के दरमियान बजरी और मीट्टी कारन समुद्र तल उपर उठा और हिमालय कि उत्पत्ति मे महत्वपूर्ण भूमिका अदाकी l
जिससे इओसिन काल के दरमियान बृहद् हिमालय की रचना, त्यारबाद मायोसीन काल दरमियान लघु हिमालय कि रचना तथा प्लायोसिन काल दरमियान शिवालिक हिमालय पर्वतमाला बाह्य हिमालय पर्वतमाला की रचना हुए l
भु - तक्ती विवर्तन का सिद्धांत (The theory of plate tectonic origin)
हिमालय की उत्पत्ति के लिए भु - तकती विवर्तन सिद्धांत सर्व मान्य है l यह सिद्धांत हेरी 1961- 62 मे दीए गए समुद्र तल प्रसरण सिद्धांत पर आधारित है l भु- तकती विवर्तन सिद्धांत 1967 मे मेकेन्जी, मोर्गन और पार्कर द्रारा अनुसार 70 थी 65 मिलियन वर्ष पूर्व हिमालय कि जगा पर टेथिस समुद्र था l
अन्दाजन 65 मिलियन वर्ष पूर्व भारतीय भु - तकती यह गोन्ड्वानालेन्ड खन्ड मे से विभाजित हुए और उतर पूर्वीय तरफ़ गति शुरू की और युरेशियन भु - तकती तरफ़ गति शुरू की l
जिस के कारण युरेशियन भु - तकती और भारतीय भु - तकती के बीच आया हुआ टेथिस समुद्र मे रही हुए बजरी और मीट्टी, खडक पर दबाव उत्पन्न हुआ l
समय के साथ दोनों प्लेटो के एक दूसरे के नजदीक आती गए l ओर दबाव बढता गया l
बजरी तथा निक्षेपन और खडक के कारण संकोचन और गेडीकरण कि प्रक्रिया शुरू होए l जिस से हिमालय की तीन श्रेणीया उत्पन्न हुइ l
वर्तमान समय मे भी भारतीय भु - तकती की उतर दीशा मे गति चालु है l जिससे वर्तमान मे भी हिमालय की उचाइ बढ रही है l
हिमालय का भुप्रुष्ट की द्रष्टि से वर्गीकरन (Physiographic divisions of the Himalaya in hindi) :
भुप्रुष्ट की द्रष्टी से हिमालय को मुख्यरुप मे चार श्रेणी मे वर्गीक्रुत किया है l
- ट्रान्स / टेथिस हिमालय (The trans /Tethys himalaya)
- बृहद् हिमालय (The greater himalaya)
- लघु हिमालय (The lessar himalaya)
- बाह्य हिमालय /शिवालिक हिमालय (The order /Shivalik himalaya)
ट्रान्स / टेथिस हिमालय (The trans /Tethys himalaya in hindi )
ट्रान्स हिमालय बृहद् हिमालय की उतर मे आइ हुइ पर्वतमाला है l वह तिबेट मे से पसार होती इस लिए उसे तिबेट हिमालय कहा जाता है l
ट्रान्स हिमालय मे काराकोरम, लदाख, कैलाश और जास्कर जेसि अगत्य कि पर्वत श्रेणी ओ का समावेश होता है l
ट्रान्स हिमालय टेथिस समुद्र के अवशेष मिले है l जिस मे दरियाइ जीव के अवशेष का समावेश है l ट्रान्स हिमालय की लबाइ पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर लगभग 1000 km है l जब की उसकी चोडाइ उतर से दक्षिण दिशा मे लगभग 225 km जीतनी है l
- काराकोरम पर्वतमाला (The karakoram range) :
काराकोरम पर्वतमाला ट्रान्स हिमालय की सबसे उतर की पर्वतमाला है l यह पर्वतमाला को क्रिष्णागीरी भी कहा जाता है l यह पर्वतमाला "एशिया की रीढ़ की हड्डी " कहा जाता है l यह भारत की अफ़ग़ानिस्तान और चीन के साथ सरहद बनाती है l
काराकोरम पर्वतमाला मे आया हुआ K2 पर्वत 8611 meter यह भारत का सबसे बडा जबकि विश्व का दुसरे नंबर का उचा पर्वत है l
लदाख का उच्चप्रदेश काराकोरम पर्वतमाला का उतर पूर्व मे आया हुआ प्रदेश है l जिस की सरेराश उचाइ समुद्र सपाटी से 5000 meter जीतनी है l जो भारत के सबसे ज्यादा उचाइ पर आता हुआ प्रदेश है l
काराकोरम पर्वत माला ध्रुविय प्रदेश की बहार विश्व के कुच बड़े ग्लेशियर आए हुए है l
नुब्रा घाटी मे आया हुआ 75 km जीतना लबा सियाचीन ग्लेशियर यह ध्रुविय प्रदेश के बहार का सबसे बडा ग्लेशियर है l
यह उपरान्त काराकोरम पर्वतमाला मे हिस्पर, बाल्टोरा, कियाफ़ो और बातुरा जेसे अन्य महत्वपूर्ण ग्लेशियर आए हुए हैं l काराकोरम पर्वतमाला मे काराकोरम कारा ताग तथा खुजेराब जेसि घाटीया आइ हुइ है l
- लद्दाख पर्वतमाला (The ladakh Range) :
लद्दाख पर्वतमाला काराकोरम पर्वतमाला की दक्षिण - पूर्व मे आइ हुइ है l वह श्योक और सिंधु नदी को अलग करती है l लद्दाख पर्वतमाला में आया हुआ खाद्रुग ला घाट भारत का सबसे उचा आया हुआ घाट है l
जहासे भारत का सबसे उचाइ पर आया हुआ सड्क मार्ग है l वो लेह को सियाचीन ग्लेशियर के साथ जोडता है l
- जास्कर पर्वतमाला (The zasker range) :
जास्कर पर्वतमाला लदाख पर्वत माला के समान्तर उसकि दक्षिण मे आइ हुइ है l जिसमे से सिंधु नदी की सहायक नदी जास्कर पसार होती है l
यह पर्वतश्रेणी जम्मु कश्मीर से उतराखन्ड तक नीकालती है l उतराखन्ड मे आया हुआ माउन्ट कामेट (7786 meter) यह जास्कर श्रेणी का सबसे उचा पर्वत है l
यह उपरान्त फ़ोटु ला घाट भी यह पर्वत्तश्रेणी आया हुआ है l
- कैलाश पर्वतमाला (The kailash range) :
कैलाश पर्वतमाला पश्चिम तिबेट मे आया हुआ लद्दाख पर्वतमाला की शाखा है l माउन्ट कैलाश 6714 meter यह पर्वतमाला सबेस उचा पर्वत है l कैलाश पर्वतश्रेणी मे से सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्रा जेसी महत्व की नदीया नीकलती है l कैलाश पर्वत यह हिंदू तथा बौध्द धर्मो का महत्वपूर्ण पवित्र स्थल है l
बृहद् हिमालय (The greater himalaya in hindi )
बृहद् हिमालय को आन्तरीक हिमालय पर्वतमाला or हमेशा बरफ़ से ढ्न्का रहेता है l इस लिए उसको हिमाद्रि के तोर पर पहचाना जाता है l
बृहद् हिमालय एकमात्र पर्वत श्रेणी है l जो पश्चिम से पूर्व तरफ़ सातत्य रखती है l बृहद् हिमालय उतर मे आया हुआ इन्ड्स त्सान्गयो सचर जोन (Indus tsangpo suture zone - ITSZ ) यह भारतीय और युरेशियन भु तकती के बीच सीमा निश्चित करता है l
इत्स्ज़ बृहद् हिमालय के समान्तर आया हुआ है l काराकोरम पर्वतमाला तथा लदाख का उच्च प्रदेश ITSZ कि उतर मे आया हुआ है l
बृहद् हिमालय पश्चिम मे गिलगित, बाल्टिस्तान मे आया हुआ नंगा पर्वत शिखर (8126 meter )से पूर्व मे अरुणाचल प्रदेश मे आया हुआ नामचा बरवा शिखर 7782 meter तक विस्तरीत है l बृहद् हिमालय पाकिस्तान, चीन, भारत, नेपाल और तिबेट मे से होकर गुजरता है l
बृहद् हिमालय पर्वतमाला उतर -पश्चिम मे नंगा पर्वत के पास और उतर -पूर्व मे नामचा बरवा के पास सिनटेक्शियन बेन्ड बनाता है l जहासे वह दक्षिण कि ओर बढता है l
बृहद् हिमालय मे पर्वतो का सरेराश उचाइ 6100 meter है l जबकि सरेराश चोडाइ उतरे से दक्षिण दीशा मे 25 km और आशरे लन्बाइ 2300 km जीतनी है l
विश्व मे सबसे उचा पर्वत माउन्ट एवरेस्ट 8848 meter यह बृहद् हिमालय मे आया हुआ है l उसके उपरांत नंगा पर्वत 8126 meter, अन्नपूर्णा 8091 meter ,कान्चनजन्गा 8586 meter, नामचा बरवा 7756 meter जेसे विश्व के अनेक उचे पर्वत शिखर आए हुए है l जो हमेशा हिमच्छादित रहते है l
यह पर्वत माला मे कइ सारे ग्लेशियर आए हुए हैं l दा त गगोत्री और यमनोत्री ग्लेशियर, उतर की नदी ओ मे ग्लेशियर का पानी और हिम आच्छदित प्रदेश के बरफ़ पीगलने से पूरे साल नदीओ मे पानी रहता है l
बृहद् हिमालय का उतरी ढ्लान सौम्य है l जो तिबेट को उच्च प्रदेश को मिलती है l जबकि दक्षिण की ढलान तीव्र है l
बृहद् हिमालय मे मुख्यत्वे ग्रेनाइट, शिस्ट नाइस जेसे आए हुए है l इस के उपरांत रुन्पातरीत और प्रस्तर खडको का भी समावेश होता है l
लघु हिमालय और शिवालिक कि तुलना मे बृहद् हिमालय मे वारिस कम होती है l उसकी उचाइ ज्यादा होने के कारण वन क्षेत्र भी कम है l
लघु हिमालय (The lesser Himalaya in hindi )
लघु हिमालय मध्य हिमालय तथा हिमाचल हिमालय के तोर पर जाना जाता है l लघु हिमालय, बृहद् हिमालय की दक्षिण मे जबकि बाह्य / शिवालिक हिमालय उतर दीशा मे आइ हुइ पर्वतमाला है l जो बृहद् हिमालय के समान्तर आइ हुइ है l मेइन सेन्ट्रल थ्रस्ट (main central thrust) से लघु हिमालय से अलग होती है l
लघु हिमालय की चोडाइ उतर से दक्षिण तक 60-80 km है l जबकि समुद्र सपाटी से 3700-4500 meter जीतनी है l
लघु हिमालय पर्वतमाला मुख्यत्वे होगजेक टोपोग्राफ़ी बनाता है l होगजेक टोपोग्राफ़ी का मतलब उतर ढलान सौम्य और दक्षिण ढलान तीव्र है l
लघु हिमालय का दक्षिण ढलान तीव्र तथा उज्जड है जबकि उतरी ढलान सौम्य तथा वन आच्छादित है l
लघु हिमालय मे पीरपन्जल (जम्मु -कश्मीर) , लदाख, धौंला धार (हिमाचल प्रदेश), मसूरी, नागतिब्बा उतराखन्ड और महाभारत (नेपाल) जेसी पर्वतमाला आइ हुइ है l
पीर पन्जल पर्वतमाला यह लघु हिमालय मे आइ हुइ सबसे लंबी पर्वत श्रेणी है l
जिसकी लंबाइ लगभग 320km जीतनी है l यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर मे नीलम (किशनगन्गा - जेलम नदी की सहायक है) से शुरू होकर दक्षिण -पश्चिम जम्मु कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश मे से पसार होती है l और हिमालय प्रदेश मे बियास नदी तक विस्तारीत है l
पीरपन्जल पर्वतमाला मे पीरपन्जल और जम्मु - श्रीनगर को जोडता बनिहाल जेसे महत्व के घाट आए हुए हैं l
पश्चिम तरफ़ पीरपन्जल तथा बृहद् हिमालय के बीच कश्मीर खाइ आइ हुइ है l
बृहद् हिमालय और लघु हिमालय के बीच सुन्दर, फ़लद्रुप तथा गीच बस्ती वाली खाइ आइ हुइ है l
यह उपरांत लघु हिमालय मे शिमला, कुलु, मनाली, मसुरी, नैनिताल और डेलहाउसी जेसे महत्व के हिल रिसोर्ट है l
नैनिताल, भीमताल, और चन्देरताल जेसे सुन्दर, तालाब भी पर्वतमाला में है l लघु हिमालय मुख्यत्व रूपान्तरित खडको आए हुए हैं l
बाह्य हिमालय पर्वतमाला / शिवालिक हिमालय ( The outer / shivalik himalaya In hindi )
बाह्य हिमालय यह शिवालिक हिमालय के तोर पर पहचाना जाता है l यह हिमालय की सबसे दक्षिण की पर्वत श्रेणी है l मेइन बाउन्ड्री थ्रस्ट (main boundary thrust) शिवालिक हिमालय को लघु हिमालय से अलग करता है l
शिवालिक हिमालय लघु हिमालय के जेसे होगजेक टोपोग्राफ़ी बनाता है l शिवालिक हिमालय की सरेराश उचाइ 600 meter है l जबकी चोडाइ उतर - दक्षिण दीशा मे 15-52 km जीतनी है l शिवालिक हिमालय पश्चिम में ज्यादा जबकी पूर्व मे कम चोडाइ है l
शिवालिक हिमालय पश्चिम मे पोट्वार उच्चप्रदेश से पूर्व मे ब्रह्यपुत्र नदी के खाइ प्रदेशो मे विस्तारित है l
यह पर्वतमाला मुख्यरुप से वाताभिमुख बारिश प्राप्त करती है l परंतु उसके साथ उतरी हिमालय मे से आती नदी द्वारा बहुत क्षरण और निक्षेपन हुआ है l
हिमालय मे से निकलती नदी ओ द्वारा बहुत घसारण हुआ है l सिक्किम के पास तिस्ता और रैन्डाक नदी अपना रास्ता बारबार बदलती होने के कारण 80 से 90 km लंबाइ का विस्तार जो शिवालिक हिमालय का था वह गायब हो गया है l
शिवालिक हिमालय अन्य श्रेणी ओ से असतत (Discontinue) पर्वत श्रेणी है l
शिवालिक हिमालय पर्वतमाला और मध्य हिमालय के बीच के ढलानो की खाइ को दून कहते है l
example : दहेरादून, कोटलीदून.
दहेरादून सबसे विशाल दून है l जिसकी लंबाइ 35-45 km और चोडाइ 22-25 km जीतनी है l पूर्व भारत मे हिमालय नदी ओ द्वारा लाया हुआ कान्प से तराइ का फ़लद्रुप मेदानी प्रदेश का द्वार कहा जाता है l जो चाय के उत्पादन में बहुत महत्व है l
हिमालय का प्रादेशिक वर्गीकरन (Regional Division of Himalaya in hindi )
हिमालय का राज्य की द्रष्टी से पांच भागो मे वर्गीकरन किया गया है l
- कश्मीर हिमालय अथवा उतर पश्चिम हिमालय ( The Kashmir /North western Himalaya)
- हिमाचल ओर उतराखन्ड (कुमाउ) हिमालय (The Himachal / Uttarakhand (kumaun) Himalaya)
- सिक्किम ओर दार्जिलिंग हिमालय (The Sikkim /Darjiling Himalaya )
- अरुणाचल हिमालय ( The Arunachal Himalaya)
- उतर पूर्वीय हिमालय (The North Eastern Himalaya )
कश्मीर हिमालय अथवा उतर पश्चिम हिमालय ( The Kashmir /North western Himalaya in hindi)
कश्मीर हिमालय में मुख्यरुप से काराकोरम, लदाख, जास्कर और पीरपन्जल की पर्वत माला का समावेश होता है सबसे ज्यादा ग्लेशियर कश्मीर हिमालय मे है l जेसेकी सियाचीन, बालटोरो प्रसिध्द ग्लेशियर का समावेश होता है l
कश्मीर हिमालय के उतर पूर्व मे आया हुआ लद्दाख विस्तार को ठन्डा रण के तोर से पहचाना जाता है l जो काराकोरम और बृहद् हिमालय की पर्वतमाला के बीच स्थित है l कश्मीर हिमालय की मुख्य खासियत कश्मीर खाइ कारेबा की रचना करता है l
कारेवा यह हिम स्तर की मीट्टी तथा हिम अश्मावली (moraine) का निक्षेपन है l जो केसर, (saffron), बदाम, अख़रोट, और सेब की खेती लिए होता है l
कश्मीर हिमालय के बहुत सारे महत्व के घाट जेसे की बृहद् हिमालय मे जोजी ला, लदाख हिमालय मे खार्दुगला, जास्कर पर्वतमाला में फ़ोटु ला और पीरपन्जल पर्वतमाला मे बनिहाल (banihal) जेसे महत्व के घाटो है l
कश्मीर हिमालय मे भारत के अगत्य के मीठे पानी के सरोवर दल और वुलर तथा खारे पानी का सरोवर पेगान्ग त्सो (pengong Tso) और त्सो मोरीरी (Tso moriri का समावेश होता है l
हिमालय का दक्षिण भाग के ढलानो के समान्तर खाइ आइ हुइ है l जो दून की तोर पे पहचाना जाता है l उदा. जम्मु दून और पठानकोट दून कश्मीर तथा उतर पश्चिम हिमालय उसकी समृद्ध घाटीओ सुन्दरता तथा उसका मनोहर द्रश्यो के लिए प्रसिद्ध है l
जो विश्वभर मे पर्यटन को आकर्षित करता है l यह उपरांत वैष्णोदेवी, अमरनाथ गुफ़ा और चरार इ शरीफ़ जेसे प्रसिद्धयात्रा धामो कश्मीर हिमालय मे आए हुए हैं l
हिमाचल ओर उतराखन्ड (कुमाउ) हिमालय (The Himachal / Uttarakhand (kumaun) Himalaya in hindi )
हिमालय और उत्तराखंड (कुमाउ) हिमालय यह पश्चिम मे रावी और पूर्व मे काली नदी तक विस्तृत है l हिमाचल हिमालय का उतर भाग लदाख के ठ्न्डे रण को विस्तारीत करता है l जो लाहोल और स्पिती जिल्ले मे आया हुआ है l
हिमाचल और उत्तराखंड हिमालय मे हिमालय की तीनो पर्वतश्रेणी बृहद् हिमालय, लघु हिमालय हिमाचल प्रदेश मे धौलाधार और उत्तराखंड मे नागतिब्बा और शिवालिक हिमालय अनुक्रम मे उतर से दक्षिण तक देखे जा सकते है l
हिमाचल और उत्तराखंड हिमालय मे शिमला, धरमशाला, कुलु मनाली, मसूरी, नैनिताल और रानीखेत जेसे प्रसिद्ध गीरीमथक आए हुए हैं l सुप्रसिद्घ 'फ़ुलोकी घाटी ' भी यह हिमालय मे है l
उसके उपरांत गन्गोत्री, यमनोत्री, केदारनाथ ,बद्रीनाथ और हेमकुन्ड साहिब जेसे यात्रा स्थल आये हैं l
हिमाचल और उत्तराखंड हिमालय मे गन्गोत्री, मिलाम और पीडर जेसे प्रसिद्ध ग्लेशियर आए हुए हैं l भारत को तिबेट के साथ जोडता बारा लाचा ला, शिपकि ला, लिपुलेख और नीति ला जेसे घाट आये हुए हैं l
यह हिमालय की खासियत 'दून की रचना ' है l उदा. देहरदून, चंडीगढ़ - कलकादून, कोटादून. हिमाचल और उत्तराखंड हिमालय मे आये हुए बृहद् हिमालय के खाइ प्रदेश मुख्यत्वे भोटीया जाति के लोग बसते है l जो गुमक्ड जीवन जीते है l वह लोग गरमी की ऋतु मे उचाइ पर आये घास के मेदान बुगियाल की ओर चले जाते है l शरदी की ऋतु में वापस खाइ प्रदेश मे आ जाते है l
सिक्किम ओर दार्जिलिंग हिमालय (The Sikkim /Darjiling Himalaya in hindi )
सिक्किम और दार्जिलिंग हिमालय पश्चिम नेपाल हिमालय और पूर्व मे भुटान हिमालय के साथ जोड़ा हुआ है l
सबसे बडा धिखरो मे कांचनन्जघा हिमालय आया हुआ है l उपरांत सिक्किम चीन के साथ नाथुला और कीप ला जेसे घाट आए हुए हैं l
यह हिमालय उसके द्वार की रचना के लिए प्रसिद्ध है l जो चाय के उत्पादन के लिए सहायरुप है l यह उपरांत सिक्किम और दार्जिलिंग हिमालय उसकी वनस्पति और जानवर स्रुष्टि के लिए प्रसिद्ध है l
अरुणाचल हिमालय ( The Arunachal himalaya in hindi)
अरुणाचल हिमालय पश्चिम मे भूटान हिमालय के साथ जुडा हुआ है l जबकि पूर्व मे डिफ़ु (Diphu) घाट सुधी विस्तारीत है l अरुणाचल हिमालय की दीशा दक्षिण पश्चिम से उतर पूर्व तरफ़ है l
अरुणाचल हिमालय महत्व के ड्फ़ला (Dafla), मिरि (Miri), अबोर (Abor), मिश्मी (Mishmi) , और नामचा बरवा (Namcha Barua) पर्वतो का समावेश होता है l
यह हिमालय मे बोमडी ला (Bomdi la), दिहान्ग (Dihang), दिबान्ग (Dibang) और डिफ़ घाटो आए हुए है l
अरुणाचल हिमालय मे से महत्व की एसी कामेग डिहान्ग, डिबान्ग और लोहीत नदी पसार होती हैं l यह हिमालय की बहुत सारी जनजाति बसती है l
पश्चिम से पूर्व तरफ़ मोनपा (monpa) अबोर (Abor), मिश्मी (Mishmi), Nyishi, और नागा जनजातिओ का समावेश होता है l
मुख्यरुप से जुम (Slah and Burn) खेती होती है l यह उपरांत अरुणाचल हिमालय बहुत सी जैव विविधता वाला प्रदेश है l
उतर पूर्वीय हिमालय (The North Eastern Himalaya in hindi )
हिमालय पूर्व मे नामचा बरवा के पास सिनटेक्शियल बेन्ड बनाता है l जबकि दक्षिण तरफ़ है l पूर्वीय पर्वतो श्रेणी अलग अलग राज्य मे अलग अलग नाम से जानी जाती है l
जेसे की उतर मे पतकाइ बुम (patkal bum), नागालैण्ड मे नागा पर्वत, मणिपूर मे मणिपूर पर्वत जबकि मिजो पर्वत अथवा लुशाय पर्वत कहा जाता है l मेघालय मे जैन्तिया, खासि, गारो पर्वत है l यह पर्वत बहुत से जनजाति ओ का बसेरा है l
पूर्वीय पर्वतमाला मुख्यत्वे नदी ओ के कारण अलग होती है l मणिपुर और मिजोरम मे बराक नदी मुख्य है l मणिपुर मे विशाल लोकट्क सरोवर आया हुआ है l जो चारो ओर से पहाडो से घिरा हुआ है l
यह सरोवर मे तैरती फ़ुमडस (phumdis) के कारन प्रसिद्ध है l यह फ़ुमडीस पर स्थित कैबुल लमजा ओ ( kelbul lamjao) राष्ट्रीय उधान विश्व का एक मात्र तैरता राष्ट्रीय उधान है l
एस. बी. बुराइ द्वारा हिमालय का प्रादेशिक वर्गीकरन
सर सिडनी गेराल्ड बुरार्ड ( sir Sidney Gerald Burrard) द्वारा नदीय खाइ प्रदेशों के आधार पर हिमालय का प्रादेशिक भागो मे विभाजन किया गया है l
सिंधु नदी से सतलुज नदी के बीच का पर्वतीय विस्तार (पंजाब हिमालय) ु
सतलुज से काली नदी के बीच का पर्वतीय विस्तार (कुमाउ हिमालय)
काली और तिस्ता नदी के बीच का पर्वतीय विस्तार (नेपाल हिमालय)
तिस्ता और ब्रह्मपुत्र नदी के बीच का पर्वतीय विस्तार (असम हिमालय / पूर्वीय हिमालय)
हिमालय के महत्वपूर्ण घाट
बनिहाल घाट
पीरपन्जाल पर्वत श्रेणी मे समृद्ध सपाटी से लगभग 2835 meter की उचाइ पर आने वाला घाट बनिहाल घाट है l जो जम्मु को श्रीनगर के साथ जोड्ता है l
शरदी की ऋतु मे यह घाट बरफ़ ढन्क जाता है l इस लिए समग्र वर्ष दरमियान रोड परिवहन शक्य बनाने के लिए जवाहर टनल का निर्माण किया गया है l
यह टनल का उदघाटन वर्ष 1956 मे वडा प्रधान जवाहर लाल नेहरू के हाथों हुआ था l
बारा लाचा ला घाट
बृहद् हिमालय मे समृद्ध सपाटी से 4843 meter की उचाइ पर बारा लाचा ला घाट हिमालय प्रदेश को लदाख के साथ जोडता राजमार्ग यहा से पसार होता है l
पीरपन्जाल घाट
लघु हिमालय की पीरपन्जाल पर्वतश्रेणी मे से ऎतिहासिक पीरपन्जाल घाट मे से मुगल रोड (mugal road) पसार होता है l
जम्मु को श्रीनगर के साथ जोड्ता यह सबसे सरल और छोटा रास्ता है l परंतु विभाजन के बाद इसे बन्ध किया गया है l
जान्जी ला घाट
बृहद् हिमालय मे समृद्ध सपाटी से 3850 meter की उचाइ पर आया हुआ है l यह घाट श्रीनगर को लदाख के कारगिल और लेह के साथ जोडता है l
श्रीनगर से लेह जाता रास्ता नेशनल हाइवे ने:1 NH -1 यहा से पसार होता है l
शरदी की ऋतु मे भारी बरफ़वर्षा होती है l और रोड बन्ध होजा ते है l
इस लिए पूरे साल परिवहन चालु रखा जासके इस लिए जोजीला टनल का निर्माण कार्य किया जा रहा है l
नाथुला घाट
बृहद् हिमालय मे समृद्ध सपाटी से 4310 meter की उचाइ पर भारत चीन सरहद पर आया हुआ नाथु ला घाट सिक्किम को तिबेट के साथ जोडता है l
प्राचीन रेशम मार्ग (silk road) की एक शाखा यहा से पसार होती है l
भारत और चीन के बीच होते व्यापार का तीन सरहदी मार्गो मे रहे एक यह व्यापारी मार्ग है l
वर्ष 1962 के बाद भारत चीन युद्ध के बाद यह व्यापारी मार्ग बन्ध था और उसे 2006 मे वापस खोला गया l
बोमडी ला घाट
बृहद् हिमालय से समुद्र सपाटी से 2600 meter की उचाइ पर आया हुआ बोमडी ला घाट अरुणाचल प्रदेश को तिबेट की राजधानी ल्हासा के साथ जोडता है l
जेलेप घाट
बृहद् हिमालय मे समुद्र सपाटी से 4538 meter की उचाइ पर आया हुआ जेलेप ला घाट सिक्किम का अगत्य का घाट बनाता है l जो चुम्बी घाटी होकर गन्गटोक सिक्किम के तिबेट की राजधानी ल्हासा के साथ जोडता है l
लिपुलेख घाट
उत्तराखंड के पिथौरागढ जिले मे आया हुआ लिपुलेख घाट उत्तराखंड को तिबेट के साथ जोडता है l कैलास पर्वत और मानसरोवर तीर्थ यात्री यह घाट से होकर जाते हैं l
शिपकी ला घाट
बृहद् हिमालय मे समुद्र सपाटी से 4300 meter उचाइ पर आया हुआ यह घाट हिमालय प्रदेश को तिबेट के साथ जोडता है l
डिफ़ु घाट
अरुणाचल प्रदेश के पूर्व भाग मे यह घाट अरुणाचल प्रदेश को म्यानमार के साथ जोडता है l
हिमालय का महत्व (Significant of Himalayas in hindi)
भारत के उतरमे आया हुआ हिमालय का बहुत महत्व है l उस कि सांस्कृतिक, भौगोलिक, राजनैतिक, रणनीतिक महत्व है l
- हिमालय पर्वतमाला भौगोलिक विभाजन के साथ सांस्कृतिक, आबोहवा तथा नदीओ की भी विभाजन है l
- अक्षांशीय द्रष्टि देखा जाय तो भारतीय प्रदेश समशीतोष्ण आबोहवा का होना चाहिए परंतु वास्तव में उष्णकटीबन्धीय आबोहवा है l जो हिमालय के कारण है l
- हिमालय कि पर्वत माला मोसमी पवनो के उत्पत्ति का कारण है l और बारिश की ऋतु मे भेजवाले पवन को उतर तरफ़ आगे जाने से रोकता है और ज्यादा बारिश लाने मे मदद करता है l हिमालय पर्वतमाला मध्य एशिया ओर साइबेरिया के रण में से आते ठंडे ओर सुके पवन को भारत में आने से रोकता है l
- पश्चिम से पूर्व तरफ़ जाते जेट स्ट्रीम को हिमालय दो भागो मे विभाजित करता है l जिस का एक भाग उतर भारत परसे जाने के कारन शर्दीकी ऋतु मे उतर भारतीय प्रदेश में बारिश लाने मे महत्व की भुमिका भजता है l
- हिमालय पर्वतमाला भारत की चीन, नेपाल, भूटान, म्यानमार देशों के बीच प्राकृतिक सीमा बनाता है l यह भारत की उतरी सरहद बनाता है जो आक्रमण कारी ओ से संरक्षण देता है l
- हिमालय पर्वतमाला में अनेक बडे ग्लेशियर, जरने ओर सरोवर आये हुए हैं l जो उतर भारत की नदी ओ के पानी का मुख्य स्त्रोत है l
- हिमालय पर्वतमाला मे अनेक एसे स्थल है जाहा नदी पर बंद बाधके जलविध्युत उत्पादन करने मे आते है l
- हिमालय पर्वतमाला में से निकलती नदीओ द्वारा होते Erosion ओर निक्शेपन के कारण नदीओके प्रवाह के साथ आते कान्प मेदानी प्रदेशो पर जमा होकर मेदानो की फ़लद्रुपता बढाते है l
- हिमालय के ढोणाव समशीतोष्ण आबोहवा मे होते फ़लो की खेती के लिए अनुकुल आबोहवा देता है l
- हिमालय पर्वतमाला मे समृद्घ वनस्पति स्रुष्टि ओर प्राणि स्रुष्टि है l हिमालय विश्व का जैव विविधता होटस्पोट है l
- हिमालय पर उष्णकटीबन्धीय जंगल से समशीतोष्ण जंगल आए हुए हैं l जिस मे से लकडी, लाख, गोन्द, जेसे अनेक जंगल पेदाशो मिलते है l
- हिमालय पर्वतमाला मे धात्विक ओर अधात्विक खनीज भंडार आए हुए हैं l जेसेकि पेट्रोलियम, किमती पथ्थरो, कोइला, ताब्र, जसत, सोना, चांदी l
- हिमालय पर्वतमाला प्राकृतिक सौन्दर्य, मनोरंजन ओर पवित्र यात्रा धामो आए हुए है l
